नकारात्मक विचारों से दूर रखती है महागौरी की आराधना

 

नवरात्रि की अष्टमी तिथि को मां महागौरी की आराधना की जाती है. ऐसी मान्यता है  कि भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए मां महागौरी ने शिव की कठोर तपस्या की थी जिससे उनका शरीर काला पड़ गया था. लेकिन जब भगवान शिव ने प्रसन्न हो कर माता को दर्शन दिए तब शिव कृपा से माँ महागौरी का काला हुआ शरीर पूर्ण रूप से गोरा हो गया. इसलिए इनका नाम गौरी रखा गया. शास्त्रों के अनुसार त्रेता युग में माता सीता ने भी भगवान श्री राम को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माँ महागौरी की आराधना की थी.

कैसा है स्वरूप ?

माँ महागौरी का स्वरूप श्वेत है. श्वेत रंग में इनका ध्यान करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है. विवाह सम्बन्धी तमाम बाधाओं के निवारण में इनकी पूजा अचूक होती है.

पूजा विधि
पीले वस्त्र धारण करके माँ महागौरी की आराधना की जाती है. मां के समक्ष दीपक जलाएं और उनका ध्यान करें. पूजा में मां को श्वेत या पीले फूल अर्पित करें. उसके बाद इनके मन्त्रों का जाप करें.

आराधना से लाभ

अष्टमी में मां महागौरी की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है. कहा जाता है कि मां महागौरी माता की पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और मन में विचारों की शुद्धता आती है.

 

 

By Pankaj Kumar