रामनवमी- भवसागर से पार कराने वाला नाम है....राम

आज चैत्र रामनवमी है. नवरात्र का नौवां दिन. इस दिन माँ भगवती के सिद्धिदात्री स्वरूप की उपासना की जाती है. नवमी का हिन्दू धर्म में विशेष स्थान है क्योंकि चैत्र नवमी के दिन ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने धरती पर अवतार लिया था. इसीलिए चैत्र की नवमी को रामनवमी भी कहा जाता है.

श्रीराम भगवान विष्णु के 7 वें अवतार हैं. जनमानस में ऐसी धारणा व्याप्त है कि श्री राम का अवतार धरती पर धर्म को हानि पहुंचाकर अधर्म का साम्राज्य स्थापित करने वाले लंकेश रावण का वध करने के लिए हुआ था. रावण का वध प्रभु श्री राम के अवतार लेने के अनेकों कारणों में से एक कारण था. सिर्फ रावण वध के लिए राम धरती पर नहीं आए थे. रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास लिखते हैं ....

विप्र, धेनु, सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार

निज इच्छा निर्मित तनु, माया गुन गो पार !!

अर्थात .. भगवान ने ब्राह्मण, गाय, देवता और संतों के लिए मनुष्य का अवतार लिया था. वे माया और उसके गुण इन्द्रियों से परे हैं. उनका दिव्य शरीर अपनी इच्छा से ही बना है.

गोस्वामी तुलसीदास के दोहे से स्पष्ट है कि भगवान श्री राम का धरती पर अवतरण अपने उन भक्तों के लिए हुआ था जो हजारों वर्षों से उनकी झलक पाने को प्रतीक्षारत थे. राम के माता-पिता दशरथ और कौशल्या भी उन्हीं हजारों भक्तों में से एक थे. मनुष्य रूप में जन्म लेकर भगवान ने एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, आदर्श पति, आदर्श राजा और आदर्श पिता का चरित्र कैसा हो इसकी शिक्षा दुनिया को दी. पुराणों के अनुसार राम नाम की महिमा व्यापक है. कलयुग में समस्त पापों को नष्ट करने और भवसागर को पार करने का एक ही मंत्र है राम नाम का निरंतर जप.

भगवान राम अत्यंत सरल हैं, सौम्य हैं और सहज प्राप्य हैं. उनकी आराधना के लिए सिर्फ उनके नाम का सुमिरण ही पर्याप्त है. राम नाम के सुमिरण से व्यक्ति सामान्य जीवन की मोहमाया, छल-कपट, घृणा-वैमानश्य आदि व्यभिचारों से दूर होकर एक निर्मल और सुखी जीवन जीता है.

 

By Pankaj Kumar