वरुथिनी एकादशी को जप तप करने से मिलती है भगवान विष्णु की विशेष कृपा 

7 मई को वरूथिनी एकादशी है. हिन्दू पंचांग के अनुसार वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को वरूथिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है. वरूथिनी एकादशी में भगवान विष्णु की आराधना की जाती है. एकादशी व्रत सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु को अति प्रिय है. इस दिन माता लक्ष्मी सहित भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक की तमाम मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
पूजा विधि 
एकादशी व्रत का माहात्म्य अपार है. इसलिए साधक को पूर्ण पवित्रता के साथ पूजा अर्चना करनी चाहिए. प्रातः स्नान करें. भगवान विष्णु की प्रतिमा, तस्वीर या शालिग्राम (विष्णु का रूप माना जाता है ) के सामने बैठें. अगर शालिग्राम की पूजा कर रहे हैं तो उन्हें स्नान कराएं. भगवान विष्णु को पीला रंग अति प्रिय है. इसलिए वस्त्र, पुष्प, प्रसाद आदि पिले रंग में हो तो सर्वोत्तम है. घी का दीप जलाएं, प्रसाद में तुलसी दल अवश्य शामिल करें. भगवान विष्णु के मन्त्रों से उनकी आराधना करें. माता लक्ष्मी की भी पूजा करें. 

एकादशी के दिन साधक को कैसे रहना चाहिए पूरे दिन अनाज ग्रहण न करें 
दिन में न सोएं 
तुलसी का पत्ता न तोड़ें (पूजा के लिए एक दिन पहले तोड़ लें)
ब्रम्हचर्य का पालन करें 
पूरे दिन विष्णु मन्त्र का जाप करना चाहिए

By Pankaj Kumar