हरिद्वार कुम्भ- जानिए कब कब है विशेष स्नान की तिथियाँ

हरिद्वार में कुम्भ स्नान चल रहा है. देश भर के साधु संतों के अलावा आम जनता भी कुम्भ के अवसर पर गंगा स्नान कर पुण्य की भागी बन रही है. कुम्भ स्नान का पौराणिक महत्व है. शास्त्रों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति कुम्भ स्नान करता है तो उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और वह धर्म कर्म के प्रति ज्यादा आस्थावान बन जाता है.

इस बार कुम्भ में 6 प्रमुख स्नान है. पहला प्रमुख स्नान था मकर संक्रांति को. दूसरा मुख्य स्नान है आज. आज मौनी अमावस्या है. पुराणों के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत धारण कर गंगा स्नान करने और दान पुण्य करने से व्यक्ति के साथ साथ उसके पितरों का कल्याण होता है. मान्यता यह भी है कि मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत धारण करने से मनुष्य की वाक शक्ति प्रबल होती है.

कुम्भ का तीसरा प्रमुख स्नान वसंत पंचमी (16 फरवरी) को है. चौथा प्रमुख स्नान माघ पूर्णिमा की तिथि पर 27 फरवरी को है. पाँचवाँ स्नान 13 अप्रैल को चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर और छठा और अंतिम पुण्य स्नान 21 अप्रैल को राम नवमी के दिन है. कुम्भ के दौरान प्रतिदिन गंगा स्नान लाभकारी होता है लेकिन प्रमुख स्नान दिवसों के दिन गंगा स्नान अति विशेष बताया गया है.

नागा साधु होते हैं आकर्षण का केंद्र

कुम्भ मेले का आकर्षण नागा साधु होते हैं. पहाड़ों और कंदराओं में अपनी ज़िंदगी बिताने वाले नागा साधु सिर्फ कुम्भ मेले में ही भौतिक दुनिया में दिखाई देते हैं. उनका अनोखा वेष सामान्य जनता को काफी आकर्षित करता है.  

By Pankaj Kumar