गुरुनानक जयंती- सिखों के पहले धर्म गुरु गुरुनानक देव की आज जयंती है

आज सिखों के पहले गुरु और सिख धर्म के संस्थापक माने जाने वाले गुरुनानक देव जी की जयंती है. गुरुनानक जयंती प्रतिवर्ष कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाई जाती है. यह दिन पूरी दुनिया में फैले सिख समुदाय के लोगों के लिए बेहद खास होता है. इसे प्रकाश पर्व अथवा गुरु पर्व के रूप में भी मनाया जाता है. गुरुनानक जयंती के अवसर पर गुरुद्वारों में शब्द कीर्तन का आयोजन किया जाता है तथा गुरुनानक देव जी दिए गए ज्ञान को अपने जीवन में आत्मसात करने की प्रतिज्ञा ली जाती है. श्रद्धालु गुरुबाणी का पाठ करते हैं. जुलूस और शोभा यात्रा भी निकाली जाती है. गुरुनानक जयंती के पावन अवसर पर गुरुद्वारों के अलावा भी अलग अलग जगहों पर विशेष लंगर का आयोजन किया जाता है.  

गुरु नानक देव

सिखों के पहले धर्म गुरु और सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी का जन्म 29 नवंबर 1469 को नानकाना साहिब (पाकिस्तान) में हुआ था. बचपन से आध्यात्मिक चिंतन में गहरी रुचि रखने वाले नानक जी ने ईश्वर की खोज में मात्र 8 वर्ष की उम्र में स्कूल छोड़ दिया था. धीरे धीरे वे सांसारिक चीजों से दूर होते गए और अपनी दुनिया ईश्वर और सत्संग से जोड़ ली. गुरुनानक देव ने 18 वर्ष की उम्र में माता सुखमणी से शादी की थी.

ऐसा माना जाता है कि गुरुनानक देव जी को नदी में लंबी समाधि लेने के दौरान ईश्वर की अनुभूति हुई थी. इसके बाद उन्होंने मानवता के उत्थान के लिए संदेश दिए. गुरुनानक देव ने कहा कि ईश्वर एक है. वह मेहनती लोगों और सभी का आदर करने वाले लोगों से खुश रहता है.

गुरुनानक देव ने अपने संदेश बाणियों के रूप में दिए हैं. जिन्हें गुरुग्रंथ साहिब में संकलित किया गया है. गुरुग्रंथ साहिब को सिख धर्म का सबसे पवित्र ग्रंथ माना जाता है.

गुरु नानक देव जी द्वारा दिए कुछ संदेश

ईश्वर एक है.

सदैव एक ही ईश्वर की उपासना करो.

ईश्वर सब जगह और प्राणी मात्र में मौजूद है. 

ईश्वर की भक्ति करने वालों को किसी का भय नहीं रहता.

ईमानदारी से और मेहनत कर के उदरपूर्ति करनी चाहिए. 

 बुरा कार्य करने के बारे में न सोचें और न किसी को सताएं. 

सदैव प्रसन्न रहना चाहिए। ईश्वर से सदा अपने लिए क्षमा मांगनी चाहिए. 

सभी स्त्री और पुरुष बराबर हैं.

दुनिया को प्रेम, मानवता, ईश्वर भक्ति और सहयोग की सिख देने वाले इस दिव्य पुरुष का परलोक प्रस्थान 22 सितंबर 1539 को हो गया था. लेकिन आज भी गुरुनानक देव जी के बताए रास्ते पर चलते हुए करोड़ों सिख श्रद्धालु मानवता की सेवा में लगे हुए हैं.

By Pankaj Kumar