चैत्र नवरात्रि- प्रथम दिन ऐसे करें माँ शैलपुत्री की आराधना

आज से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रही है. आज से ही हिन्दू नववर्ष की शुरुआत भी हो रही है. नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की आराधना की जाती है. माता का जन्म पर्वतराज हिमालय के यहाँ होने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा.

कैसा है स्वरूप ?

माँ शैलपुत्री का स्वरूप दिव्य है. वे नंदी नाम के वृषभ पर सवार होती हैं. वे दाहिने हाँथ में त्रिशूल और बाएं हाँथ में कमल का फूल धारण करती हैं.

पूजा विधि

नवरात्रि के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र को लकड़ी के पटरे पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाकर स्थापित करना चाहिए. माँ शैलपुत्री को सफेद वस्तु प्रिय है इसलिए पुष्प, माला, फल मिष्टान आदि में सफेद रंग का समावेश होना चाहिए. प्रसाद में बर्फ़ी, लौंग, सुपारी और मिश्री का अर्पण करना चाहिए. लौंग पान के पत्ते पर रखें, घी का दीपक जलाएं और उत्तर दिशा में मुंह करते हुए ‘ॐ शैलपुत्रये नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें.

फल              

माँ शैलपुत्री की शांत मन द्वारा की गई भावपूर्ण आराधना से जीवन में स्थिरता और दृढ़ता आती है, दामपत्य जीवन सुखमय होता है, कष्ट मिटते हैं, कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है. पारिवारिक कलह की समाप्ति होती है.

By Pankaj Kumar