नवरात्री के चौथे दिन करें मां कुष्मांडा की पूजा ,सभी रोगों से मिलेगी मुक्ति

 

नवरात्री के चौथे दिन आज देवी के चौथे स्वरुप मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है. मां कुष्मांडा ने अपने उदर से ब्रम्हांड को उत्पन्न किया था. अपनी मंद मुस्कान के द्वारा ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इनका नाम कुष्मांडा हुआ. मां सूर्य के भीतर लोक में रहती हैं। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्ही में है .इनके शरीर की क्रांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यमान है . इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित होती है .यह अनाहत चक्र को नियंत्रित करती है. मां की आठ भुजाएं है .इसलिए ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात हैं. संस्कृत में कुष्मांडा को कुम्हड़ कहते है और मां कुष्मांडा को कोंहड़ा बहुत प्रिय है .

कैसे करें मां कुष्मांडा की पूजा और क्या है मां का भोग

मां कुष्मांडा को हरा रंग अत्यधिक प्रिय है ,इसलिए मां की पूजा हरे वस्त्र पहन कर करें साथ ही मां को हरी इलाइची ,सौफ और कुम्हड़ अर्पित करें, अगर कोई व्यक्ति काफी समय से घर में बीमार हो तो मां कुष्मांडा की पूजा पूरे विधि विधान से करें मां कुष्मांडा की पूजा उस व्यक्ति को अच्छी सेहत प्रदान करती  है  .इसके बाद उनके मुख्य मन्त्र “ॐ कुष्मांडा देव्यै नम:” का 108 बार जाप करें. चाहें तो सिद्ध कुंजिका स्त्रोत्र का पाठ करें.

अनाहत चक्र की समस्या होने से क्या होता है

ह्रदय और छाती की समस्या

घबराहट और बेचैनी की समस्या,नींद का ना आना

डर लगने की समस्या ,नकारात्मक और बुरे विचारों का आना

मन और अनाहत चक्र को कैसे मजबूत करें

हरे वस्त्र धारण करें .अगर संभव हो तो हरे आसान पर बैठ कर ही पूजा करें .इसके बाद अपने गुरु को प्रणाम करें .अनाहत चक्र पर बिंदु का ध्यान करें .ध्यान के बाद गुरु से इस चक्र को मजबूत करने की प्रार्थना करें .

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