भारत में इन जगहों पर रावण की पूजा की जाती है

 

आज दशहरा है. इसे विजयादशमी भी कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि 10 दिनों के घनघोर युद्ध के बाद आज ही के दिन भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का वध किया था. प्रभु श्री राम द्वारा रावण को मारे जाने की घटना को असत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की विजय के रूप में देखा जाता है. यही कारण है कि सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर के कई देशों में विजयादशमी के दिन रावण के पुतले का दहन किया जाता है. लेकिन आपको जानकार आश्चर्य होगा कि राम को पूजने वाले भारत देश में ही ऐसी कई जगहें है जहां रावण का पुतला दहन नहीं किया जाता है तथा उसे राक्षस के रूप में नहीं देखा जाता है.  

भारत में सात जगहों पर रावण का पुतला दहन नहीं होता बल्कि उसकी आराधना की जाती है. ये सात जगहें हैं..

जोधपुर (राजस्थान)- यहां के कुछ समाज विशेष के लोग खुद को रावण का वंशज मानते हैं और रावण का पूजन करते हैं. यहाँ रावण का मंदिर है.

गढ़चिरौली, अमरावती ( महाराष्ट्र) – यहाँ रहने वाला आदिवासी समुदाय रावण की  पूजा करता है. यह समुदाय रावण को अपना देवता मानता है.

काकिनाड (आंध्रप्रदेश)- यहाँ भी रावण का मंदिर बना हुआ है. यहां आने वाले लोग रावण को शक्ति सम्राट मानते हैं. इसलिए भगवान शिव के साथ रावण की भी पूजा की जाती है.

बिसरख गांव (उत्तर प्रदेश)- यहाँ रावण का मंदिर बना हुआ है और उसकी पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि बिसरख गांव रावण का ननिहाल था.

मंदसौर (मध्य प्रदेश)- यहाँ रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था. ऐसे में मंदसौर रावण का ससुराल हुआ. इसलिए यहां रावण के पुतले का दहन करने की बजाय उसकी पूजा की जाती है.

रावनग्राम गाँव (मध्य प्रदेश)- इस गांव में रावण की विशालकाय मूर्ति भी स्थापित है. यहां के लोग रावण को भगवान के रूप में पूजते हैं. इसलिए इस गांव में दशहरे पर रावण का दहन करने के बजाए उसकी पूजा की जाती है.

कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)- मान्यता है कि रावण ने यहां पर भगवान शिव की तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे मोक्ष का वरदान दिया था. यहां के लोगों की ये भी मान्यता है कि अगर उन्होंने रावण का दहन किया तो उनकी मौत हो सकती है. इस भय के कारण भी लोग रावण का पुतला दहन करने की बजाए उसकी पूजा करते हैं.

By Pankaj Kumar