कैसे करें देवी के चंद्रघंटा स्वरूप की आराधना

       

नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरुप की पूजा की जाती है. मान्यता है कि माता रानी का चंद्रघंटा स्वरुप भक्तों को निर्भय और सौम्य बनाता है. इनके सर पर घंटे के आकार का चंद्रमा है, इसलिए इनको चंद्रघंटा कहा जाता है. इनके दसों हाथों में अस्त्र शस्त्र है और इन की मुद्रा युद्ध की मुद्रा है. मां चंद्रघंटा तंत्र साधना में मणिपुर चक्र को नियंत्रित करती है. ज्योतिषों के अनुसार माना जाता है कि जिन जातकों का चंद्रमा कमजोर होता हैं, उन्हें मां चंद्रघंटा की पूजा अवश्य करनी चाहिए.

आइए जानें मां चंद्रघंटा को किस चीज का भोग लगाएं और इनकी किस प्रकार पूजा करें

मां चंद्रघंटा की पूजा में उपासना के सुनहरे या पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए, अगर मां चंद्रघंटा की पूजा लाल वस्त्र धारण करके करते है तो श्रेष्ठ होता है. मां को सफ़ेद और पीले गुलाब की माला अर्पण करें, चन्दन और लाल चुनरी समर्पित करना उत्तम होता है. इनकी पूजा से मणिपुर चक्र मजबूत होता है और भय का नाश होता है.

भोग: मां को केसर की खीर और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए, पंचामृत, चीनी व मिश्री भी मां को अर्पित करनी चाहिए

मणिपुर चक्र के कमजोर होने से क्या होता है ?

इसके कमजोर होने से व्यक्ति के अन्दर साहस नहीं होता है. व्यक्ति के अंदर भय की वृति होती है. यह व्यक्ति के अंदर तृष्णा और मोह पैदा करता है .इससे ही व्यक्ति के अंदर ईर्ष्या, घृणा और लज्जा का भाव आता है.

 

 

 

 

 

 

 

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